क्या कम पूँजी से भी मिल सकती है बड़ी कामयावी ?
मेरा जन्म केरल के वायनाड जिले के एक दूरस्थ (जहाँ न सड़क
थी, न बिजली) गाँव में दिहाड़ी मजदूर परिवार में हुआ | इसलिए माता-पिता से pocket money
पाने कि कल्पना भी नहीं की जा सकती थी | पड़ने में मै औसत छात्र था, हालाँकि मै
गणित में अच्छा था, लेकिन और हिंदी और अंग्रेजी में fail होने के कारण मै कक्षा 6
में fail हो गया | मेरे पिता ने मेरी study छुडवा दी और मजदूरी करने के कहा |
लेकिन मेरे गणित के शिक्षक ने मेरे पिता को समझाया और वह मुझ पर व्यक्तिगतरूप से
ध्यान देने लगे | स्कूल के बाद भी मुझे अपने पास
बैठा कर पढाते थे, नतीजा यह हुआ कि सातवी कक्षा में मैं प्रथम आया | कॉलेज
की पढाई के दौरान मेरे पिता के एक मित्र ने मेरी मदद की | इंजीनियरिंग प्रवेश
परीक्षा में मेरी 63वी रैंक आई | और मैंने computer science में इंजीनियरिंग की | एक
स्थानीय startup कंपनी में मुझे तुरंत 6000/- की नौकरी मिल गई | उसके बाद मैंने
मोटोरोला, फिर city bank, दुबई में काम करने लगा, जहाँ मेर वेतन एक लाख रूपए से
ज्यादा था | जब मैंने एक महीने का वेतन अपने पिता को क़र्ज़ चुकाने के लिए भेजा, तो
वे हैरान रह गए और देरतक ख़ुशी से रोते रहे | फिर मैंने न केवल अपने माता-पिता के
लिए घर बनवाया, बल्कि तीन बहनों कि शादी की | सात वर्ष बाद मैं जब Bangalore लौटा,
तो मेरे पास बचत के पंद्रह लाख रूपए थे | फिर मैंने MBA करने का फैसला किया | MBA
करने के दौरान मैं नियमितरूप से अपने चचेरे भाई के किराने कि दुकान पर बैठता था |
उसीने मुझे बताया कि इडली, डोसा का बैटर प्लास्टिक के बैग में बिकता है, मैं भी
इसका व्यवसाय करना चाहता हूँ | मुझे ये idea पसंद आ गया और हमने 25 हज़ार रूपए से
दिसम्बर 2005 में ID fresh food company बनाकार बैटर व्यवसाय शरू किया | उस समय
हमने मात्र दो ग्राइंडर, एक मिक्सर और कुछ प्लास्टिक के पैकिट से कारोवार कि
शुरुवात की थी| चूंकि काम काजी महिलाओ के लिए खाना बनाने में इससे सुविधा होती थी,
इसलिए लोग इसे खरीदने लगे और पहले दिन से ही हमें मुनाफा होने लगा था, इसलिए मैंने
उसमे और निवेश किया | इस तरह समय समय पर जैसे जैसे हम निवेश बढ़ाते गए, हमारा
व्यवसाय विस्तार पाटा गया | आज प्रतिदिन हमें पचास हज़ार के लोग बैटर बनाते है और
भारत के कई बड़े शेहरो और विदेशों में हमारा व्यवसाय फैला हुआ है | हमारा सालाना
कारोवार 182 करोड़ रूपए का है |
"अच्छे सहयोगी मिले और निष्ठांपूर्वक कोई काम शुरू किया
जाये, तो छोटी पूँजी से भी बड़ी सफलता हासिल कि जा सकती है | "
सूत्र-अज्ञात


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