कौन-सी लड़ाई लड़नी है, और कोन-सी नहीं, इसका निर्णय महत्वपूर्ण है |




दोस्तों आपके लिए एक छोटी सी कहानी है जिससे हम सीखेंगे कि हमें छोटी- छोटी बातो में किसी से नहीं उलझना चाहिए | 

        हर्ष कई वर्षो बाद अमेरिका से घर लौटा था | वह वहां एक बड़ी कंपनी में काम करता था | उसके पास घर, गाड़ी सबकुछ था, पर उसके दिल अपने देश के लिए धडकता रहता था | उसे देखकर कोई नहीं कह सकत था कि वह इतने वर्षों तक अमेरिका में रहा | एक दिन उसके दोस्त ने उसको एक पार्टी में बुलाया | वहां ज्यादातर लोगों से पहली बार मिल रहा था | बाते करते-करते कुछ लोग हर्ष पर झूठ बोलने का इल्जाम लगते हुए बोले, अगर यह सच में अमेरिका से आया होता, तो इसकी भाषा, इसका रुतबा कुछ और ही होता | हर्ष अपने दोस्त को लेकर चुपचाप घर चला गया | उसके दोस्त ने पुछा, तुमने उन्हें कुच कहा क्यों नहीं? हर्ष बोला, माँ ने बचपन में एक कहानी सुनाई थी कि एक बार एक जंगल में हथियो का एक जुंड नदी में से नाहा कर आ रहा था | वहीँ सामने से कीचड़ में लिपटे कुछ सूअर आ रहे थे| हाथिओं का सरदार उन्हें जाने का रास्ता देने के लिए किनारे खड़ा हो गया | सरदार को देख बाकि हाथी भी किनारे खड़े हो गए | वहां से गुजरने के बाद एक सूअर ने दोस्तों से कहा, देखि मेरी ताकत जब मै चलता हूँ, तो हाथी भी मेरे रस्ते से हट जाया करते है | हाथिओं ने सरदार से पुछा, वे सूअर आपके शरीर के दसवे हिस्से के बराबर भी नहीं | आप चाहते, तो उन्हें पल भर में कुचल कर आगे बड जाते | फिर भी आपने उन्हें रास्ता क्यों दे दिया? हाथिओं का सरदार बोला, हम सब उस समय नहाकर निकले थे | वे सरे सूअर गंदे और घिनौने थे | हम अगर उनसे उलझते, तो हम भी उन की तरह गंदे हो जाते | और फिर क्या यह जरूरी है कि हमारी पहचान किसी को नीचा दिखाकर ही हो? मैंने अपनी इज्जत को उन तुच्छ प्राणियों से ऊपर आँका, इसलिए उन पर ध्यान न देना ही अकलमंदी समझी |
       कौन-सी लड़ाई लड़नी है, और कौन-नसी नहीं, इसका निर्णय महत्वपूर्ण है |

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